सुप्रीम कोर्ट द्वारा अवमानना की कार्रवाई शुरू करने और बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) आयुक्त अश्विनी भिड़े के वेतन पर रोक लगाने के कुछ ही घंटों बाद BMC प्रशासन ने बोरीवली में बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हटाओ अभियान शुरू कर दिया। BMC अधिकारियों ने 4 नवंबर 2027 को सुबह 7 बजे से अवैध दुकानों, झुग्गियों और व्यावसायिक निर्माणों को हटाने की कार्रवाई शुरू की।
जिस जमीन पर यह कार्रवाई की जा रही है, उसे बृहन्मुंबई इलेक्ट्रिक सप्लाई एंड ट्रांसपोर्ट (BEST) के बस डिपो और इलेक्ट्रिकल सब-स्टेशन के लिए आरक्षित किया गया था। BMC अधिकारियों ने संकेत दिया कि लंबे समय से लंबित बेदखली अभियान के तहत अगले 24 घंटे के भीतर पूरी जमीन को अतिक्रमण मुक्त करा लिया जाएगा।
BMC की इस त्वरित कार्रवाई के पीछे सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार को अहम वजह माना जा रहा है। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने मंगलवार को BMC प्रशासन के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई थी। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने जमीन खाली कराने के लिए अतिरिक्त समय मांगने वाली BMC आयुक्त अश्विनी भिड़े की याचिका खारिज कर दी थी। अदालत ने उन पर 5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था। इसके अलावा, अवमानना की कार्रवाई में कारण बताओ नोटिस का निपटारा होने तक आयुक्त अश्विनी भिड़े और संबंधित कर्मचारियों के वेतन भुगतान पर रोक लगा दी थी।
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने टिप्पणी की थी, “यह सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का जानबूझकर और शरारतपूर्ण तरीके से किया गया उल्लंघन है, जिसमें अतिक्रमणकारियों की सीधी मिलीभगत और उन्हें समर्थन प्राप्त है।” उन्होंने चेतावनी दी थी कि अदालत के आदेश का पालन नहीं करने वाले अधिकारियों को जेल भी भेजा जा सकता है।
जस्टिस बागची ने स्पष्ट निर्देश दिया था कि जब तक अदालत के आदेश का पूरी तरह पालन नहीं हो जाता, तब तक BMC आयुक्त अश्विनी भिड़े को वेतन नहीं मिलेगा।
बोरीवली की इस जमीन को लेकर कानूनी विवाद वर्ष 1986 से चल रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त 2025 में निजी डेवलपर को निर्देश दिया था कि वह 3,400 वर्ग मीटर जमीन BMC को सौंप दे, ताकि तीन महीने के भीतर वहां प्रस्तावित सुविधा शुरू की जा सके। और BMC को आदेश दिया था कि वह जमीन को अतिक्रमण मुक्त करे। परन्तु BMC प्रशासन उदासीन बना रहा।
